चर्चित फिल्म अर्ध सत्य एक बार फिर बड़े पर्दे पर
मुंबई। बालीवुड की चर्चित फिल्म अर्ध सत्य को एक बार फिर बड़े पर्दे पर देखने के बाद दिवंगत अभिनेता ओम पुरी को याद करते हुए भावनात्मक श्रद्धांजलि दी है। फिल्म के दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने सोशल मीडिया पर ओम पुरी की एक पुरानी तस्वीर साझा की और उनके अभिनय की गहराई और संवेदनशीलता को लेकर दिल से लिखा कि ओम पुरी सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे, वे एक विचार, एक भावना और उस दौर के आम आदमी की जीती-जागती अभिव्यक्ति थे।
शाह ने लिखा कि उन्होंने लंबे समय बाद अर्ध सत्य को फिर से देखा, जिसमें ओम पुरी और सदाशिव अमरापुरकर की अदाकारी ने उन्हें फिर एक बार प्रभावित किया। उन्होंने हॉलीवुड निर्देशक निकोलस रे द्वारा अभिनेता हम्फ्री बोगार्ट के लिए कही गई बात का हवाला देते हुए कहा कि वही बात ओम पुरी पर भी सटीक बैठती है—वे महज अभिनय नहीं करते थे, बल्कि अपने किरदार में पूरी तरह ढल जाते थे और दर्शकों को उसकी सच्चाई से जोड़ देते थे। ओम पुरी का चेहरा और उनकी आंखें हर दृश्य में अपने आप में एक संवाद बन जाती थीं। अर्ध सत्य का निर्देशन गोविंद निहलानी ने किया था और यह 1983 में रिलीज हुई थी। फिल्म एस. डी. पनवलकर की शॉर्ट स्टोरी सूर्या पर आधारित थी, जिसमें ओम पुरी ने पुलिस इंस्पेक्टर अनंत वेलंकर की जटिल और जुझारू भूमिका निभाई थी। यह किरदार एक ऐसे पुलिस अफसर का था जो न सिर्फ सिस्टम की गंदगी से लड़ता है, बल्कि अपने भीतर की टूटन और अतीत की पीड़ा से भी जूझता है। इस किरदार को ओम पुरी ने इतनी संवेदनशीलता और ताकत से निभाया कि वह आज भी याद किया जाता है। फिल्म में स्मिता पाटिल, अमरीश पुरी, सदाशिव अमरापुरकर और नसीरुद्दीन शाह जैसे मजबूत कलाकारों ने भी अहम भूमिका निभाई थी।
शाह ने फिल्म में माइक लोबो नामक निलंबित पुलिस अधिकारी का किरदार निभाया था। ओम पुरी और नसीरुद्दीन शाह न सिर्फ सह-अभिनेता थे, बल्कि राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय और बाद में एफटीआईआई के दिनों से गहरे दोस्त भी रहे। दोनों ने भारतीय समानांतर सिनेमा को नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। ओम पुरी का 6 जनवरी 2017 को 66 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। उस समय वह एक मराठी फिल्म की शूटिंग में व्यस्त थे।
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