महाकुंभ में आए 129 साल के बाबा शिवानंद ने बताए लंबी आयु के टिप्स
प्रयागराज। महाकुंभ 2025 में पद्मश्री से सम्मानित शिवानंद बाबा पहुंचे हैं। इनकी उम्र है 129 साल। इनकी फिटनेस और दिनचर्या देख सभी दंग रह गए। एक साक्षात्कार में उन्होंने अपने बारे में बताया। वहीं, बाबा शिवानंद की शिष्या डॉक्टर शर्मिला ने उनसे जुड़ीं कई जानकारियां साझा कीं। बाबा ने बताया कि लोग आखिर इतनी कम उम्र में मौत का शिकार होते जा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने लंबी उम्र के लिए टिप्स भी बताए।
पद्मश्री स्वामी शिवानंद बाबा ने कहा कि आज लोग बहुत खराब जिंदगी जी रहे हैं। लोग सही ढंग से दिनचर्या का पालन नहीं करते हैं। इसके अलावा लोगों का खानपान भी दूषित हो गया है। उन्होंने कहा कि लोगों को सुबह जल्दी उठना चाहिए। इसके बाद गर्म पानी पीना चाहिए। नित्यकर्म आदि से निवृत्त होकर योग करना चाहिए। शिवानंद बाबा ने बताया कि इसके अलावा लोग हर छोटी-छोटी समस्या के लिए दवाएं खाते हैं। इससे बचना चाहिए। एलोपैथिक दवाएं, एंटीबायोटिक्स हमारे शरीर को लंबे समय के लिए कमजोर बना देती हैं। इसके अलावा लोगों को फास्टफूड से बचना चाहिए। भूख से ज्यादा खाना खाकर भी लोग बीमारी हो रहे हैं।
बता दें बाबा शिवानंद का जन्म आठ अगस्त, 1896 में बांग्लादेश के श्रीहट्ट जिले के हरिहरपुर गांव में हुआ था। उनका परिवार भिक्षा मांगकर जीवन यापन करता था। बहुत कम उम्र में ही बाबा शिवानंद को उनके माता-पिता ने नवद्वीप निवासी एक वैष्णव संत स्वामी ओंकारानंद गोस्वामी को सौंप दिया था। यहां पर शिवानंद बाबा का मानसिक और आध्यात्मिक विकास हुआ। कुछ वक्त अपने गुरु की आज्ञा से शिवानंद बाबा अपने माता-पिता से मिलने पहुंचे। यहां पर उन्हें पता चला कि उनकी बड़ी बहन की मौत हो चुकी है। इसके कुछ ही दिन के बाद उनकी मां और पिता भी चल बसे। इसके बाद वह अपने गुरु आश्रम में लौट आए।
बाबा शिवानंद की दिनचर्या भोर में तीन बजे से शुरू होती है। चाहे कोई भी मौसम हो, नित्यकर्म से निपटने के बाद वह ठंडे पानी से ही स्नान करते हैं। योग, पूजा और भजन करते हैं। उनका भोजन सात्विक और सीमित होता है। वह दूध और फल भी नहीं खाते हैं। उनका कहना है कि देश के गरीबों को यह सब मिल नहीं पाता है। ऐसे में वह इसे कैसे ग्रहण कर सकते हैं। यह शिवानंद बाबा संकल्पों का ही फल है कि कड़कड़ाती ठंड में भी वह स्वेटर या मोजा नहीं पहनते हैं। उन्होंने सिर्फ दो जोड़ी सूती कपड़े बनवाएं हैं, उससे ही उनका काम चलता है।
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